कभी-कभी अचानक फ़ोन बजता है और दूसरी तरफ़ से आवाज़ आती है “मनु… तू ठीक है न?” तो कभी “तूलिका… सब ठीक तो है?” मैं एक पल के लिए चुप हो जाती हूँ। सोचती हूँ, मैंने तो किसी से कुछ कहा भी नहीं। न अपनी परेशानी किसी को बताई, न ही किसी से अपने मन […]
“कुछ लोग एक रोज़ जो बिछड़ जाते है वो हजारों के आने से मिलते नहीं उम्र भर चाहे कोई पुकारा करे उनका नाम वो फिर नहीं आते, वो फिर नहीं आते …” तब एहसास होता है कि जीवन का सबसे बड़ा सत्य मृत्यु नहीं, बल्कि उसका अनिश्चित होना है। हमें नहीं पता होता… कौन-सी मुलाक़ात…आख़िरी […]
जब भी किसी परीक्षा का परिणाम आने वाला होता है, हर घर में उम्मीदों, डर, ख़ुशी और बेचैनी का एक अजीब सा माहौल हो जाता है। हमारे घर में भी कुछ ऐसा ही माहौल था जब मेरी बेटी का 12th बोर्ड का रिज़ल्ट आने वाला था। रिज़ल्ट आया… कुछ विषयों में उसके अच्छे नंबर थे, लेकिन मैथ्स और फिज़िक्स में कम नंबर आने की वजह से उसकी ओवरआल परसेंटेज उम्मीद से कम रह गई। 12वीं का रिज़ल्ट सामने था।सबकी नज़र नंबरों पर थी…लेकिन मेरी नज़र बार-बार अपनी बेटी के चेहरे पर जा रही थी क्योंकि उन नंबरों से कहीं ज़्यादा… Read more: क्या आपके बच्चे का सपना वास्तव में उसका अपना है?
कुछमेरे बारे में
नमस्कार, मैं हूँ तूलिका…
मेरे लिए लेखन सिर्फ शब्दों को कागज़ पर उतारना नहीं बल्कि जीवन को समझने और महसूस करने का एक माध्यम है।
मैं ज़िंदगी के छोटे-छोटे अनुभवों, रिश्तों, संघर्षों और अनकहे एहसासों को शब्द देने का प्रयास करती हूँ, जो अक्सर हमारे भीतर ही रह जाते हैं। सच कहूँ तो मैं जितना अधिक लिखती हूँ, ज़िन्दगी को और क़रीब से समझ पाती हूँ।
अगर मेरे लिखे शब्दों से किसी के चेहरे पर भी मुस्कुराहट आ जाये, किसी के मन को सुकून मिल पाये, किसी को आगे बढ़ने की हिम्मत मिल पाये या कोई ख़ुद को थोड़ा और समझ पाये, ख़ुद से मिल पाये, तो मुझे लगेगा है कि मेरा लिखना सार्थक हो गया।