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ये Overrrrrrrrrr लोग कहाँ जाएँ?
आजकल एक शब्द बहुत आसानी से इस्तेमाल कर लिया जाता है – “ओवर”। कभी-कभी सोचती हूँ…क्या सच में किसी की बहुत परवाह करना, किसी के लिए हर वक़्त मौजूद रहना गलत है? क्या किसी के दुख में बेचैन हो जाना, उसकी ख़ामोशी में छिपी तकलीफ़ पढ़ लेना, उसकी ज़रूरत से पहले उसकी ज़रूरत समझ लेना…
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सहर्ष कर, संघर्ष कर…
अक्सर हम लोग मुश्किलों से घबरा जाते हैं और हालात को अपनी कमज़ोरी मानने लगते हैं, लेकिन सच यह है कि हर संघर्ष अपने साथ, कोई न कोई सीख लेकर आता है| जीवन कभी भी एक समान नहीं रहता| इसमें सुख-दुःख, सफलता-असफलता, आशा-निराशा हमेशा साथ-साथ चलते हैं| यदि जीवन में संघर्ष न हों, तो इंसान…
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हम मिलने आते थे…
तन्हाई ……कभी कभी ये तन्हाई भी बहुत अच्छी होती है| जब हम अपने आप को, अपनी सोच, अपने विचारों को भूल चुके होते हैं, तब ये तन्हाई ही होती है जो फिर से हमें ख़ुद से रूबरू कराती है| बेझिझक अपने आप से, अक्सर हम मिलने आते थेकहते थे दिल की हर बात, ख़ुद से ख़ूब…