
“जो दिया ज़िन्दगी ने हमें, कबूल किया हमने सभी
रंग ही तो बदला है थोड़ा, दिल है मगर अब भी वही।”
कभी-कभी ज़िन्दगी हमारे सामने ऐसी परिस्थितियाँ खड़ी कर देती है, शायद जिन्हें बदलना हमारे हाथ में नहीं होता। लेकिन उन्हें स्वीकार करके, उनके साथ आत्मविश्वास से जीना, हमारी असली ताकत बन जाता है।
Vitiligo सिर्फ त्वचा पर दिखने वाले सफेद दागों की कहानी नहीं है, यह self-acceptance, courage, mental health और self-love की भी journey है। यह ब्लॉग मेरी अपनी कहानी है, सफेद दागों से डरने से लेकर उन्हें अपनी पहचान का हिस्सा मानने तक का सफ़र।
Vitiligo क्या है?
Vitiligo जिसे Leukoderma या सफेद दाग भी कहते हैं, एक ऐसी skin condition है जिसमें त्वचा अपना प्राकृतिक रंग खोने लगती है। यह एक autoimmune disease है, जिसमें शरीर का immune system, melanin बनाने वाले cells (melanocytes) पर attack करता है। Melanin ही हमारी त्वचा को रंग देता है। जब ये cells नष्ट होने लगते हैं, तब त्वचा पर सफेद दाग बनने लगते हैं।
Vitiligo के साथ मेरा सफ़र
मुझे Vitiligo है, इसलिए सोचा कि Vitiligo Awareness Month में अपना अनुभव आप सभी के साथ साझा करूँ।
बचपन से ही मेरे शरीर पर 2–3 छोटे सफेद दाग थे, लेकिन उनका आकार कभी बढ़ा नहीं। फिर लगभग 6 साल पहले अचानक शरीर पर कई नए सफेद दाग दिखाई देने लगे। डॉक्टर्स से इलाज करवाया, लंबे समय तक steroids भी लेने पड़े, दाग तो कम नहीं हुए लेकिन इससे मेरा स्वास्थ्य बहुत अधिक प्रभावित हुआ।
डॉक्टर्स का कहना था कि दवाई और UV therapy से केवल इन दागों को फैलने से रोकने की कोशिश की जा सकती है, पूरी तरह से ठीक होना तो मुश्किल है। लेकिन दवाईयाँ और UV therapy मेरे शरीर पर काम नहीं कर पाईं और धीरे-धीरे ये दाग बढ़ते चले गए।
सिर्फ त्वचा नहीं, आत्मविश्वास भी प्रभावित हुआ
ये दाग सिर्फ मेरे शरीर पर ही नहीं, मेरे मन और आत्मविश्वास पर भी असर डाल रहे थे। हमेशा डर रहता था कि कोई इन्हें देख न ले। लंबे समय तक मैं Vitiligo concealer लगाकर इन्हें छुपाती रही।
फिर मन में सवाल आता था, “इनको छुपाना क्यों हैं? इसमें मेरी क्या गलती है?”
लेकिन सच कहूँ, तो इसे स्वीकार करना भी मेरे लिए बिल्कुल आसान नहीं था।
जब भी किसी को ये दाग दिख जाते, लोग सवाल पूछने लगते –
“अरे! ये क्या हो गया?”
“क्या ये छूने से फैलता है?”
“इसका इलाज नहीं है क्या?”
“घर में किसी और को भी है?”
“ये कुष्ठ रोग तो नहीं?”
कुछ लोग घूरते थे, तो कुछ बिना पूछे इलाज और डॉक्टर्स बताने लगते थे। यह सब भावनात्मक रूप से बहुत थकाने वाला था, है और शायद रहेगा क्योंकि लोगों का ऐसे देखना, उनकी जिज्ञासा और उनका सलाह देना कभी ख़त्म नहीं होगा। कुछ लोग अपनी चिंता में ऐसा करते हैं और शायद कुछ लोग संवेदनाओं रहित हैं जिनको यह समझ नहीं आता कि उनकी इस चिंता या प्रश्नों से सामने वाले को कैसा महसूस होगा, वह पहले ही मानसिक और भावनात्मक रूप से इस लड़ाई को लड़ रहा है।
Self-Acceptance की शुरुआत
मेरे परिवार और दोस्तों ने हमेशा मुझे समझाने और मेरा अपने ऊपर विश्वास लौटाने की कोशिश की। लेकिन शायद उनके प्रयासों और मेरी समझ में कुछ कमी थी। कहीं न कहीं सच यह भी है कि जब तक हम ख़ुद को पूरी तरह से स्वीकार नहीं करते, तब तक कोई और हमारा आत्म-विश्वास हमें नहीं लौटा सकता।
मैंने हमेशा ज़िन्दगी की हर चुनौती का सामना हिम्मत से किया है और न ही मैं मानसिक रूप से कभी भी कमज़ोर रही, फिर भी मैं Vitiligo के साथ खुलकर जीने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी। हमेशा बस यही कोशिश रहती कि सफेद दाग किसी को न दिखें क्योंकि शायद सफेद दाग दिखने से भी ज़्यादा मुझे लोगों की निगाहों और उनके सवालों से डर लगता था।
शायद यह सिलसिला और लंबा चलता, अगर मुझे एक ऐसी दोस्त न मिली होती, जिसने मुझे ख़ुद को स्वीकार करना सिखाया। उसने मुझे यह एहसास दिलाया कि ख़ुद से प्यार करने से बड़ा, इन दागों का कोई इलाज नहीं।
धीरे-धीरे मैंने ख़ुद से कहना सीखा…
“मैं जैसी भी हूँ, बहुत सुंदर हूँ।
ये दाग मेरे व्यक्तित्व, मेरे मूल्यों, मेरी अच्छाइयों और मेरी योग्यताओं को परिभाषित नहीं कर सकते।
मैं अपनी आत्मा का भी प्रतिबिम्ब हूँ, सिर्फ अपने शरीर का नहीं।”
और जब मैंने अपनी सोच में यह परिवर्तन लाना शुरू किया, उसके बाद ही शायद मैं बहुत लंबे समय बाद ख़ुद से फिर मिल पाई।
Vitiligo हमें Define नहीं कर सकता
Vitiligo का सफ़र, शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक, सभी तरह से बहुत चुनौतीपूर्ण होता है Depigmentation के धब्बे सिर्फ शरीर तक ही नहीं रहते, ये बार-बार हमारे आत्मसम्मान और आत्मविश्वास को हिलाते रहते हैं।
लेकिन यह याद रखना बहुत ज़रूरी है कि हमारी त्वचा बदल सकती है, लेकिन हमारी पहचान नहीं। हमारी सुंदरता सिर्फ हमारे चेहरे या रंग में नहीं, बल्कि हमारे दिल, हमारी सोच और हमारी आत्मा में है।
सच कहूँ तो हर सफेद दाग हमारी मानसिक ताकत की कहानी कहता है।
इस सफ़र में मैंने क्या सीखा
अपने अनुभव से मैं बस इतना कहना चाहूँगी, ख़ुद को “बेचारा” समझने से कुछ भी हासिल नहीं होता। अपनी self-worth का अंदाज़ा सिर्फ आप लगा सकते हैं, दुनिया को इसका फैसला मत करने दीजिए, अपनी uniqueness को स्वीकार कीजिए।
आत्म-विश्वास और आत्म-प्रेम आपकी सबसे बड़ी ताकत हैं।
आप बहुत सुंदर हैं और आपकी असली सुंदरता आपके भीतर, आपकी सुंदर भावनाओं में निहित है।
बात… जो मैं आप सभी से कहना चाहती हूँ
ख़ुद को प्यार करना, ख़ुद को स्वीकार करना और ख़ुद पर विश्वास रखना…यह किसी और की ज़िम्मेदारी नहीं, यह ज़िम्मेदारी सबसे पहले हमारी अपनी है।
जब हम ख़ुद को पूरे दिल से स्वीकार कर लेंगे, तब इस बात का कुछ भी मूल्य नहीं रह जायेगा कि दुनिया हमारे बारे में क्या सोचती है।
मैंने तो अपने आप को पूरी तरह से स्वीकार कर लिया है, और तय किया है कि जैसे-जैसे यह सफेद दाग और फैलेंगे, चेहरे पर भी आएंगे तो किसी नकारात्मक सोच के बिना ख़ुशी से इनको स्वीकार करुँगी। मैं यह बात अब अच्छी तरह समझ चुकी हूँ, कि आपकी असली क़ीमत सिर्फ आप तय कर सकते हैं, कोई और नहीं। और उम्मीद करती हूँ कि आप भी सबसे पहले अपने आप को प्यार करेंगे। हर परिस्थिति, हर रूप में अपने को दिल से स्वीकार करेंगे और जिंदगी की हर कठिन परिस्थिति, हर चुनौती का सामना पूरी हिम्मत और आत्म-विश्वास के साथ करेंगे।
क्योंकि Vitiligo रंग बदल सकता है, लेकिन किसी भी इंसान की ख़ूबसूरती, उसकी आंतरिक सुंदरता से है और शरीर ही केवल उसकी पहचान नहीं।
सफेद दाग कोई कमी नहीं हैं, ये हमारी कहानी का एक हिस्सा हैं। जब हम अपनी कहानी को शर्म से नहीं, प्यार से अपनाते हैं, तभी अपने को स्वीकार करने की असली शुरुआत होती है।
एक समय था जब मैं आईने में सबसे पहले अपने दागों को देखती थी। आज मैं ख़ुद को देखती हूँ, अब मेरा ध्यान उनकी तरफ जाता भी नहीं ।
एक समय था जब मैं सोचती थी कि लोग क्या कहेंगे। आज मैं लोगों के बीच पूरे विश्वास के साथ प्रस्तुत होती हूँ, बिना यह परवाह किये कि वे मेरे बारे में क्या सोचेंगे।
एक समय था जब मुझे लगता था कि मेरे शरीर से कुछ छिन गया है लेकिन अब ऐसा मानती हूँ कि शायद ज़िन्दगी मुझे बहुत कुछ सिखाना चाहती थी, मुझे और हिम्मती बनाना चाहती थी और मुझे vitiligo की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए एक मिसाल बनने का मौका देना चाहती थी।
इस सफ़र ने मुझे सिखाया कि आत्मविश्वास त्वचा से नहीं, आपके व्यक्तित्व, आपके मन की सुंदरता से आता है। ख़ुद से प्रेम करना तब सबसे ज़्यादा ज़रूरी होता है, जब दुनिया आपको अलग नज़रों से देखने लगे। मैंने यह भी सीखा कि हमारी पहचान सिर्फ हमारा शरीर नहीं हो सकता, हम उससे कहीं अधिक हैं।
आज भी मेरे शरीर पर सफेद दाग हैं जो बढ़ते जा रहे हैं लेकिन अब वे मुझे डराते नहीं हैं।
वे मुझे हर दिन मेरी हिम्मत, मेरी ताकत की याद दिलाते हैं कि कैसे मैंने अपने सबसे कठिन दिनों को पार किया है। वे मुझे याद दिलाते हैं कि कैसे मैंने ख़ुद को खोकर फिर से पाया है।
और शायद इसी वजह से अब मुझे अपने दाग़ों से शिकायत नहीं है क्योंकि उन्होंने मुझसे मेरा रंग नहीं छीना…उन्होंने मुझे मेरी असली पहचान से मिलवाया है।
यदि आप भी vitiligo के साथ जी रहे हैं जिसे स्वीकार करना आपके लिए मुश्किल है, तो मैं बस इतना कहना चाहूँगी…
ख़ुद को थोड़ा समय दीजिए।
ख़ुद पर थोड़ा भरोसा रखिए।
ख़ुद को उतना ही प्यार दीजिए, जितना आप दुनिया के बाकी लोगों को देते हैं।
यकीन मानिए…
जिस दिन आप ख़ुद को पूरी तरह स्वीकार कर लेंगे, उस दिन आपकी सबसे बड़ी कमजोरी ही आपकी सबसे बड़ी ताकत बन जाएगी। इस सफ़र में आपकी त्वचा के रंग भले ही बदलते रहे, लेकिन अंत में आपको वह रंग मिल जायेगा जो कभी फ़ीका नहीं पड़ता और वह रंग होगा – आत्म-स्वीकृति का ।

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