तैयारी जो पूरी नहीं होती…

ज़िन्दगी का साथ निभाना आसान नहीं है।
ज़िन्दगी हर एक दिन हमारे सामने कोई न कोई नया इम्तिहान लेकर खड़ी हो जाती है। कभी हालात हमारी हिम्मत को परखते हैं, तो कभी लोग हमारे सब्र को। कई बार हम पूरी मेहनत और सच्चाई से आगे बढ़ते हैं, हर चुनौती का हिम्मत से सामना करते हैं, फिर भी मंज़िल दूर-दूर तक नज़र नहीं आती| लेकिन शायद यही ज़िन्दगी का असली दस्तूर है… हर दिन कुछ सिखाना, कुछ बदलना और हमें पहले से ज्यादा मज़बूत बनाना।

क़ायम रख हिम्मत
और कर मज़बूत इरादा अपना
लड़ने का और आगे बढ़ने का
जैसे ही जज़्बा आता है
तैयारी पूरी नहीं होती
और नया इम्तिहान आ जाता है…

जीतते हैं तो लगता है
कि हो गईं सब परेशानियाँ ख़त्म
तभी एक नई चुनौती से
ज़िन्दगी का सामना हो जाता है
तैयारी पूरी नहीं होती
और नया इम्तिहान आ जाता है…

कैसे हैं ये ज़िन्दगी के इम्तिहान
जो होते नहीं कभी ख़त्म
मुश्किल से मुश्किल इम्तिहान भी
देना पड़ ही जाता है
तैयारी पूरी नहीं होती
और नया इम्तिहान आ जाता है…

करूँ कैसे तैयार ख़ुद को
कि जुझूँ फिर एक चुनौती से
हिम्मत का दामन भी
अब तो छूटता सा नज़र आता है
तैयारी पूरी नहीं होती
और नया इम्तिहान आ जाता है

~ तूलिका श्रीवास्तव “मनु”

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Author: तूलिका श्रीवास्तव "मनु"

जब कोई भी बात मेरे मन-मस्तिष्क को झकझोर देती है तो मैं लिखने के लिए विवश हो जाती हूँ।

One thought on “तैयारी जो पूरी नहीं होती…”

  1. सच में यही है जिन्दगी……..जिन्दगी कैसी है पहेली तू हाय…

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