कोई भी प्राणी तब तक अपने जीवन का आनंद नही ले सकता जब तक वह स्वतंत्र न हो| तुलसीदास जी ने भी कहा है “पराधीन सपनेहुँ सुख नाहीं“

ख्वाहिशों के पंख लगा
सीख तो लिया परिंदो से उड़ने का सबब
भूल गयी मैं मगर
पिंजरे में परिंदे भी उड़ा नहीं करते
-तुलिका श्रीवास्तव “मनु”